महाभारत – महिला सम्मान या जुए का परिणाम


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Categories : FEMINISM
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महाभारत एक काल्पनिक घटनाओं पर आधारित महाकाव्य है| जिसने भी यह महाकाव्य पढ़ा है या सुना है उनके मन में ये कुछ सवाल जरुर उठते होंगे| जैसे – क्या महाभारत का युद्ध धर्म युद्ध था? क्या महाभारत का युद्ध एक महिला के अपमान का बदला लेने के लिये तथाकथित भगवान् श्री कृष्णा की इच्छा से हुआ था? या यह युद्ध संपत्ति के लिये लड़ा गया युद्ध था जिसमे संपत्ति को हासिल करने के लिये एक महिला को दाव पर लगा दिया गया था?  हिन्दू धर्म को मानने वालों का मानना है कि यह युद्ध सत्य, न्याय और नारी के सम्मान  के लिये लड़ा गया युद्ध था|

          कौरवों ने छल से राज पाठ पाया| जिसमे पांडवों को बहुत अधिक कष्ट झेलने पड़े| कौरवों के द्वारा बहुत अधिक विश्वास घात किया गया| पांडवों को प्रताड़ित ही नहीं किया बल्कि उन्हें ख़त्म करने की कई बार कोशिश की गयी| कौरवों के कारण जो मुसीबतें पांडवों ने झेली उनका बदला लेने के लिये युद्ध करना जायज था| लेकिन क्या कहीं भी ऐसा प्रतीत होता है कि यह युद्ध महिला के सम्मान में लड़ा गया था?

          बहुत से धार्मिक लोगों का मानना है कि इस युद्ध के माध्यम से ईश्वर ने महिला का भरी सभा में अपमान करने वाले कौरवों को और उनका अपमान देखने वाले तथाकथित प्रतिष्ठित लोगों को सजा दी थी, लेकिन पत्नी को जुए में दाव पर लगाने वाले को कोई सजा नहीं| क्या ईश्वर न्याय में भेदभाव करता है? क्या सिर्फ कौरवों ने ही द्रौपदी का अपमान किया था? क्या जुए में हारी हुई संपत्ति को हासिल करने के लिये अपनी पत्नी को जुए में दाव पर लगाने वाला व्यक्ति उतना ही बड़ा पापी नहीं जितना कि महिला को भरी सभा में निर्वस्त्र करने वाला व्यक्ति? बचपन में स्कूल में एक कहानी पढाई जाती थी जिसमे युधिष्टिर यक्ष के प्रश्नों का जवाब बड़ी ही चतुराई से देते हैं| उस कहानी के आधार पर ही हमें बताया गया कि युधिष्ठिर धर्मराज हैं| क्या जुए में हारी हुई संपत्ति को हासिल करने के लिये अपनी पत्नी को जुए में दाव पर लगाने वाला व्यक्ति धर्म राज हो सकता है?

          पांडवों के द्वारा जुए में सब कुछ हार जाने के बाद उनके सामने एक शर्त रखी गयी कि यदि वे 12  वर्ष का ज्ञातवास और 1 वर्ष का अज्ञात वास पूर्ण कर लेते हैं तो उन्हें उनका राज पाठ वापस कर दिया जायेगा| जब वे अपनी सजा पूर्ण करके वापस लौटे तो कौरवों ने राज्य वापस करने से माना कर दिया| उसके बाद पांडवों को युद्ध के लिये मजबूर होना पड़ा| अगर कौरवों ने पांडवो को उनका राज्य वापस कर दिया होता तो क्या महाभारत का युद्ध होता? क्या राज्य वापस मिलने से पांडव अपनी पत्नी का अपमान भूल जाते?

          युद्ध के अंत में भीम और दुर्योधन के बीच गदा युद्ध का वर्णन इस प्रकार किया गया है कि प्रत्येक सुनने वाले वाले व्यक्ति को ऐसा प्रतीत होगा कि द्रौपदी के अपमान का सबसे ज्यादा बुरा भीम को ही लगा था| लेकिन जब द्रौपदी को जुए में युधिष्टिर के द्वारा दाव पर लगाया गया था तब कहाँ था ऐसा गुस्सा? क्या भीम इतने भी समर्थ नहीं थे कि अपने भाई को ऐसा अनुचित कदम उठाने से रोक पाते? या उनके लिये भी अपनी पत्नी के सम्मान से ज्यादा राज्य मायने रखता था? ऐसे बहुत से सवाल हैं जिनका धार्मिक प्रवृत्ति के लोग जवाब देने से बचते हैं|  

          वास्तविकता ये है कि कोई भी धर्म महिलाओं को वो सम्मान नहीं दे सका जिसके वो लायक हैं| क्योकि जितने भी धार्मिक ग्रन्थ लिखे गए हैं सभी पुरुषों के द्वारा ही लिखे गए हैं| ऐसा भी कह सकते हैं कि जितने भी धार्मिक ग्रन्थ लिखे गए हैं वे पुरुषों के द्वारा तथा पुरुषों के लिये लिखे गए हैं| पुरुषों ने अपना वर्चस्व कायम रखने के लिये ही सभी ग्रंथों का निर्माण किया है जो कि काल्पनिक घटनाओ पर आधारित हैं|

कोई भी देश व समाज तब तक उन्नति नहीं कर सकता जब तक नारियां उपेक्षितशोषित एवं पिछड़ी रहेंगी ।

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