लॉक डाउन – लेख 3


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Categories : THE LOCKDOWN
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लॉक डाउन का तीसरा दिन | लगभग हर बड़े शहर के बस स्टैंड पर अपने घर वापस जाने वालों की भीड़ लगी हुई है| कुछ लोगों ने पैदल ही अपने घर तक का सफ़र तय करने का निश्चय करके निकल पड़े| इस सफ़र में उन्हें भूख, प्यास, थकान के साथ साथ एक और समस्या से जूझना पड रहा है और वह है “पुलिस की क्रूरता”| लॉक डाउन के नियमों को तोड़ने वालों के खिलाफ पुलिस की सख्ती जायज है| लेकिन जो लोग मजबूरी में (बड़े सहरों से पलायन करने वाले, चिकित्सीय सुविधा आदि के लिये) अपने घरों से बहार निकल रहे हैं उनके साथ भी पुलिस ने बर्बरता पूर्ण व्यवहार किया| कुछ शहरों से पुलिस का मानवीय चेहरा सामने आया| होशंगाबाद के नर्मदा घाट पर कई मजदूर बसे हुए हैं| लॉक डाउन के बाद वे लोग वहीँ फंसे रह गये| इन मजदूरों के पास ना रहने को घर है ना खाने को खाना| ऐसे लोगों की मदद करने के लिये होशंगाबाद पुलिस मददगार बनकर सामने आई| पुलिस कर्मी इन मजदूरों को समय से खाना पहुँचाने पहुँच जाते हैं| मुरादाबाद पुलिस ने भी घरों में फंसे गरीबों, बेसहारा लोगों को जरुरी समान घर तक पहुँचाया| कश्मीर में आर्मी के द्वारा भी दिहाड़ी मजदूर और प्रवासी मजदूरों को मुफ्त में राशन दिया|

सरकार की तरफ से जो मदद देश की गरीब जनता को दी जानी थी वह बहुत धीमी गति से आ रही थी| देश के नागरिक मुसीबत में फंसे लोगों कि मदद करने के लिये आगे आये| उनके द्वारा अपने पड़ोसियों को, गरीब बस्तियों में रहने वाले गरीबों को राशन पहुँचाया गया| जो लोग बड़े शहरों से अपने घर के लिये पैदल निकल पड़े हैं, उनको खाना उपलब्ध कराने के लिये लोगों ने मुख्य मार्गों पर जाकर उन्हें खाना वितरित किया| गरीबों कि मदद करने के लिये बहुत से सामाजिक संगठन भी सामने आये| देश का हर नागरिक जाति धर्म को भुला कर एक दुसरे की मदद कर रहा है| एक बार फिर देश वासियों ने इस मुसीबत की घडी में अपनी एकता का सबूत दिया|

देश के कुछ मौका परस्त लोगों की संवेदनाएं शून्य हो चुकी हैं| एक तरफ जहाँ देश के नागरिक मुसीबत में फंसे लोगों को मदद पहुंचा रहे हैं| वहीँ दूसरी तरफ संवेदनहीन लोग, मुसीबत में फंसे लोगों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं| कुछ राशन विक्रेता, सब्जी विक्रेता, आदि जरुरत का सामान बेचने वाले लोग प्रशासन के द्वारा निर्धारित किये गए दामों से अधिक दामों में बेच रहे हैं जिससे बहुत लोग अपनी जरुरत का सामान भी नहीं खरीद पा रहे हैं| ऐसे लोगों पर प्रशासनिक अधिकारी नज़र बनाये हुए हैं| कुछ जिलों में डीएम व एसपी सिविल ड्रेस में राशन वालों की दूकान पर पहुच कर, उपभोक्ता बन कर जायजा ले रहे हैं और जो व्यक्ति निर्धारित दामों से अधिक दामों में सामान बेच रहे हैं उन पर कार्यवाही भी की जा रही है|

 

कोरोना की इस लड़ाई में सम्पूर्ण देश एकजुट है | सभी लोग जाति धर्म का भेदभाव मिटा कर एक दुसरे की मदद कर रहे हैं| लेकिन कुछ भारतियों को नस्लीय भेदभाव का शिकार होना पड़ा है| दिल्ली में नार्थ ईस्ट की एक लड़की के ऊपर पान थूककर कोरोना बोल कर लोग भाग गए थे| कोलकाता में एक नार्थ ईस्ट के व्यक्ति को इसलिए घर से बहार निकाल दिया गया क्योकि वह देखने में चाइनीस जैसा है| मुंबई में एक सिंगर जिनका नाम चैंग है, को भी नस्लीय भेदभाव का सामना करना पड़ा| इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि अगर आपको चाइनीस कहना है तो कहिये लेकिन उससे पहले इंडियन लगा लीजिये| जिस वक़्त भारत बुरे दौर से गुजर रहा है ऐसे में नस्लीय भेदभाव की घटनाएँ सामने आना बहुत ही निराशाजनक है| नस्लीय भेदभाव को अंजाम देने वाले लोगों के खिलाफ तुरंत कार्यवाही होनी चाहिए| साथ ही देश के नागरिकों को भी नस्लीय भेदभाव के खिलाफ आवाज़ उठानी चाहिए|

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