लॉक डाउन – लेख 1


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Categories : THE LOCKDOWN
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DAY-1

 

तारीख 24 मार्च 2019, समय रात 8 बजे| एक दिन के जनता कर्फ्यू के बाद कोरोना महामारी की भयावहता को देखते हुए देश के कई राज्यों ने अनेक शहरों को 3 दिन के लिये लॉक डाउन कर दिया था| जनता कर्फ्यू की आधी अधूरी सफलता के बाद प्रधानमंत्री जी देश को संबोधित करने के लिये दोबारा टेलीविज़न पर आये| उन्होंने अपने संबोधन में कहा – “कोरोना को फैलने से रोकना है तो उसके संक्रमण की जो साइकिल है, उस साइकिल को तोडना ही होगा| कुछ लोग इस ग़लतफ़हमी में हैं कि सोशल डिस्टेंसिंग केवल मरीज के लिये, बीमार लोगों के लिय आवश्यक है| ये सोचना सही नहीं| सोशल डिस्टेंसिंग हर नागरिक के लिये है, हर परिवार के लिये है, परिवार के हर सदस्य के लिये है, प्रधानमन्त्री के लिये भी है| कुछ लोगों की लापरवाही कुछ लोगों की गलत सोच आपको, आपके बच्चों को, आपके माता पिता को, आपके परिवार को, आपके दोस्तों को और आगे चलकर के पूरे देश को बहुत बड़ी मुश्किल में झोंक देगी| अगर ऐसी लापरवाही जारी रही तो भारत को इसकी बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है और ये कीमत कितनी चुकानी पड़ेगी इसका अंदाज़ा लागना भी मुश्किल है| साथियों पिछले दो दिनों से देश के अनेक भागों में लॉक डाउन कर दिया गया है| राज्य सरकार के इन प्रयासों को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए| हेल्थ सेक्टर के एक्सपर्ट्स और अन्य देश के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए, देश आज एक महत्वपूर्ण निर्णय करने जा रहा है| आज रात 12 बजे से पूरे देश में ध्यान से सुनिए, पूरे देश में आज रात बारह बजे से सम्पूर्ण देश में सम्पूर्ण लॉक डाउन होने जा रहा है| हिन्दुस्तान को बचाने के लिये हिंदुस्तान के हर नागरिक को बचाने के लिये, आपको बचाने के लिये, आपके परिवार को बचाने के लिये आज रात बारह बजे से घरों से बाहर निकलने पर पूरी तरह पाबन्दी लगायी जा रही है| देश के हर राज्य को, हर केंद्र शाषित प्रदेश को, हर जिले, हर गाँव, हर कस्बे, गली, मोहल्ले को अब लॉक डाउन किया जा रहा है| ये एक तरह से कर्फ्यू ही है | जनता कर्फ्यू से भी कुछ कदम आगे की बात| जनता कर्फ्यू से जरा ज्यादा सख्त कोरोना महामारी के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के लिये ये कदम अब बहुत आवश्यक है निशिचित तौर पर इन लॉक डाउन कि एक आर्थिक कीमत देश को उठानी पड़ेगी लेकिन एक एक भारतीय ले जीवन को बचाना है आपके जीवन को बचाना है आपके परिवार को बचाना है इस समय मेरी भारत सर्कार कि देश के हर राज्य सरकार की हर स्थानीय निकय्ब कीसबसे बड़ी प्राथमिकता हैऔर इसीलिए मेरी आपसे प्रार्थना हैऔर में हाथ जोड़ के पार्थना करता हूँ कि आप इस समय जहाँ भी हैं वहीँ रहें| अभी के ये हालत को देखते हुए देश में ये लॉक डाउन 21 दिन का होगा तीन सप्ताह का होगा|

 

जब प्रधानमंत्री जी ने 21 दिन का देशव्यापी लॉक डाउन घोषित किया तो बहुत से बुद्धिजीवी लोगों ने इसे बहुत देर से उठाया गया कदम बताया| उनका मानना था कि यह निर्णय बहुत पहले ही ले लेना चाहिए था| क्योंकि कोरोना से संक्रमित पहला व्यक्ति 30 जनवरी को मिला था| पहला केस मिलने के बाद भी विदेश से आने वाली फ्लाइट्स को बंद नहीं किया गया जबकि 30 जनवरी तक यह महामारी कई देशों में फेल चुकी थी| यदि सरकार ने सही समय पर निर्णय लेकर देश को कुछ समय पहले लॉक डाउन कर दिया होता और विदेश से वापस आये हुए भारतियों को क्वारंटाइन कर दिया होता तो शायद भारत को इतनी बड़ी समस्या से जूझना नहीं पड़ता| इस बीमारी से बचने का एक मात्र उपाय सिर्फ सोशल डिस्टेंसिंग है| लेकिन सरकार ने सोशल डिस्टेंसिंग को नज़र अंदाज़ करते हुए बहुत सारे सामूहिक आयोजन कर डाले| जो कि देश को बहुत बड़े संकट में डाल सकते थे|

 

प्रधानमंत्री जी ने अपने संबोधन में लोगों से आग्रह किया कि जो जहाँ है वहीँ रुका रहे| लेकिन क्या यह संभव है? प्रधानमंत्री जी ने अपने संबोधन में डॉक्टर्स नर्सेज के लिये सुरक्षा उपकरणों के लिये 15000 करोड़ रुपये की घोषणा कर दी| जो कि बहुत सराहनीय कदम है | परन्तु जो लोग 21 दिनों के लिये अपने घरों में कैद हो चुके हैं उनके खाने की व्यवस्था कैसे की जाएगी? इसके बारे में उन्होंने एक शब्द भी नहीं बोला| ये लॉक डाउन हर वर्ग के व्यक्ति के लिये अलग अलग है| एक आर्थिक रूप से सक्षम व्यक्ति के लिये तो यह 21 दिन एक अवकाश की तरह हैं| वे 21 दिन अपने घर में मनोरंजन करते हुए बिता देंगे| एक मध्यम वर्ग का व्यक्ति अपनी जीवन की जमा पूँजी का उपयोग करके जिन्दा रह लेगा| पर उनका क्या जो रोज़ कमाते और खाते हैं? क्या उनका परिवार 21 दिनों तक बिना खाए जिन्दा रह पायेगा? यदि सरकार इस समस्या का समाधान नहीं करती है तो गरीब व्यक्ति कोरोना से पहले भूख से ही मर जायेगा|

 

लॉक डाउन के तुरंत बाद सारी परिवहन सेवाएँ बंद कर दी गयी थी| बावजूद इसके बस स्टैंड रेलवे स्टैंड पर लोगों की भीड़ इकठ्ठा होना शुरू हो गयी| कुछ लोग तो उसी वक़्त अपने शहर के लिये रवाना हो गए जब प्रधानमंत्री जी ने लॉक डाउन घोषित किया था | शायद उन्हें अपने परिवार कि चिंता थी| उनकी चिंता भी जायज थी क्योंकि प्रधानमंत्री जी ने अपने सम्बोधन में एक बार भी इस बात का जिक्र नहीं किया कि गरीब व्यक्ति 21 दिन के लॉक डाउन में अपना जीवन यापन कैसे करेगा|

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