लॉक डाउन – लेख 4


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Categories : THE LOCKDOWN
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भारत के सुचना एवं प्रसार मंत्री श्री प्रकाश जावडेकर जी के द्वारा घोषणा की जाती है कि 28 मार्च से जनता की डिमांड पर रामायण धारावाहिक का दूरदर्शन चैनल पर फिर से प्रसारण किया जायेगा| ये ऐसा वक़्त है जब लोग अपने परिवार की रक्षा के लिये बड़े शहरों से पलायन करने लगे हैं| देश के सभी लोग सिर्फ यही सोच रहे हैं, कि 21 दिन के लॉक डाउन के दौरान अपनी व् अपने परिवार की आम जरूरतों को कैसे पूरा करेंगे? खुद खाना कहाँ से खायेंगे, अपने परिवार को कैसे खिलाएंगे? दिहाड़ी मजदूरों की स्तिथि तो अत्यंत दयनीय है| रोज़ कमाने खाने वाले कैसे अपने परिवार को जिन्दा रख पाएंगे? छोटे शहरों से बड़े शहरों में काम करने के लिये आये दिहाड़ी मजदूर पैदल ही अपने गाँव घर की तरफ निकल चुके हैं ताकि जिन्दा रह सकें| ऐसी भयावह स्थिति में कौन सी जनता ने रामायण देखने की डिमांड की है? इस वक्त जब सरकार को जनता की आम जरूरतों को पूरा करना चाहिए, बड़े शहरों के बस अड्डों पर जमा लोगों को उनके घर तक पहुँचाना चाहिए, जो लोग पैदल ही घर निकला चुके हैं उनके लिये खाने की व्यवस्था करनी चाहिए, उनका टेस्ट करना चाहिए ताकि ये महामारी छोटे शहरों व् गाँव में ना पहुंचे| बजाय इसके सरकार लोगों को रामायण दिखाना चाहती है| पर क्यों ? क्या सरकार चाहती है कि मुसीबत में फंसे लोग धर्म नाम का नशा करके अपने घरों पर पड़े रहें और अपने मूलभूत अधिकारों के बारे में न सवाल ना करें? वर्तमान में धर्म की जरूरत नहीं है, जरुरत है तो लोगों को इस महामारी से सुरक्षित रखने की, लोगों की मूलभूत सुविधाओं को पूरा करने की|

 

जिस वक़्त देश के नागरिक अपने परिवार के लिये खाने का इन्तेजाम करने की कोशिश कर रहे हैं| लाखों लोग जिंदा रहने के लिये पैदल ही अपने घरों की तरफ निकल चुके हैं|  उस वक़्त देश के बड़े बड़े नेता अपने घरों में बैठ कर रामायण का आनंद ले रहे हैं| जिस वक़्त देश को सबसे ज्यादा जरुरत है उस वक़्त देश के नेता अपने घरों में कैद हैं| सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक दूसरे पर आरोप और प्रत्यारोप  का दौर शुरू हो चुका है लेकिन जमीनी स्तर पर गरीबों के पास तक मदद कोई भी नहीं पहुंचा पा रहा है| शायद कोरोना का डर नेताओं को उनके कर्तव्य को निभाने से रोक रहा है| ये डर जायज है लेकिन देश के नेताओं के कन्धों पर ही देश के नागरिकों की जिम्मेदारी है| वे रामायण का बहाना लेकर अपने घरों में नहीं बैठ सकते| उन्हें अपनी ज़िम्मेदारी को समझना होगा और प्रत्येक नागरिक तक इस बीमारी से बचने के उपाय के बारे में बताना होगा साथ ही लोगों के जरुरत का सामान भी उपलब्ध कराना होगा

 

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