मीडिया


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Categories : POLITICS
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मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ होता है| मीडिया का लोकतंत्र में अपना अलग ही योगदान होता है| किसी भी राष्ट्र का मीडिया जितना अधिक मजबूत होगा उस राष्ट्र में लोकतंत्र की जड़ें उतनी ही मजबूत होंगी| यदि मीडिया कमजोर होगा तो उस देश पर तानाशाह राज करेंगे|  मीडिया तभी मजबूत हो सकता है जब वह निष्पक्ष हो, सच्चाई और ईमानदारी के साथ खड़ा हो| मीडिया जनता और सरकार के बीच एक पुल की तरह कार्य करता है| एक प्रकार से मीडिया जनता का प्रतिनिधित्व करता है| सरकार के द्वारा जनता के हित में लायी गयी कार्य योजनाओं, विकास कार्यों आदि के बारे में जनता को अवगत कराना सरकार का कार्य होता है तथा साथ ही मीडिया भी इस कार्य में अहम रोल निभाता है| यदि सरकार के द्वारा कोई जनता विरोधी कार्य किया जाता है तो उसके बारे में सही जानकारी देना और उसके खिलाफ आवाज़ मुखर करना मीडिया का ही काम है| मीडिया सीधे जनता की तरफ से तथा जनता के हित में सरकार से सवाल करने के लिये स्वतंत्र होता है|

 

भारतीय मीडिया का एक अलग ही चेहरा है| उपरोक्त वर्णित गुणों में से एक भी गुण आपको भारतीय मीडिया में देखने को नहीं  मिलेगा| भारतीय मीडिया पूरी तरह से सरकार के नुमाईन्दों की तरह कार्य कर रहा है| मीडिया भारत में कितनी स्वतंत्र है इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रेस फ्रीडम इंडेक्स(2018-19) में भारत को 140 वां स्थान प्राप्त हुआ है| भारत की सबसे बड़ी समस्या गरीबी, बेरोजगारी, भुखमरी, अपराध, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा आदि हैं लेकिन मीडिया इन सभी समस्याओं का इलाज हिन्दू और मुसलमानों में ढूँढता है| जब देखो तब सिर्फ हिन्दू और मुस्लमान पर बहस होती दिखाई देती| भारतीय पहले से ही धर्म नाम के नशे के आदि हो चुके है| इस नशे को ख़त्म ना होने देना मीडिया का काम है| मीडिया समय समय पर भारतियों को धार्मिक नशे की खुराक देता रहता है जिसके कारण भारत को सांप्रदायिक दंगों की आग को सहन करना पड़ता है| भारत में हिन्दुओं की आबादी लगभग 100 करोड़ है जबकि मुसलमानों की आबादी लगभग 25 करोड़| मीडिया 25 करोड़ मुसलमानों का डर दिखाकर 100 करोड़ हिन्दुओं को डराती है|  जिसका सत्ता पक्ष को फायदा होता है| वर्तमन सरकार की राजनीति सिर्फ ध्रुवीकरण पर टिकी हुई है| वर्तमान सरकार गरीबी, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा आदि मुद्दों पर विफल रही है| एक मात्र ध्रुवीकरण कराकर ही सरकार सत्ता में बनी रह सकती है| ध्रुवीकरण कराने में सरकार की सबसे बड़ी मददगार मीडिया ही है|

 

ध्रुवीकरण से सरकार सत्ता तो हासिल कर लेती है, लेकिन मानवता शर्मशार हो जाती है| भाईचारा ख़त्म हो जाता है| एक दुसरे के लिये जान देने वाले दोस्त जान के दुश्मन बन जाते हैं| सबसे अधिक भारत की आम जनता इससे प्रभावित होती है| उनके घर, व्यापार अब कुछ तबाह हो जाता है| झुग्गी झोंपड़ियों में रहने वाले गरीबों को दो वक़्त का खाना भी नसीब नहीं होता| देश के आर्थिक विकास की गति अत्यंत धीमी पड़ जाती है| दंगों की चपेट में आने से देश कई साल पीछे चला जाता है| दंगों के अंत में हमें नसीब होता है तो सिर्फ खून से लथपथ राष्ट्र|

 

दुनिया को लम्बे समय तक मुर्ख नहीं बना सकते, लेकिन धर्म ऐसा क्षेत्र है जहाँ लोगों को पीढ़ी दर पीढ़ी मुर्ख बनाया जा सकता है- अब्राहम लिंकन

 

 

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