क्या ईश्वर सर्वशक्तिमान और दयावान है?


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ईश्वर सर्वशक्तिमान है| ईश्वर परम सामर्थ्य वाला है क्योंकि वह कुछ भी कर सकता है| ईश्वर दयावान है| वह स्रष्टि का रचियता है और वही स्रष्टि का विनाशक| प्रथ्वी के सभी जीव उसकी ही संतान हैं| धरती, जल , अग्नि, वायु ईश्वर के द्वारा दिए गए वरदान हैं| स्रष्टि में जो भी घटित होता है वह ईश्वर की इच्छा से ही होता है| लेकिन सवाल उठता है कि जब भी दुनिया पर कोई आपदा आती है तब ईश्वर कहाँ  होता है? यदि वह सर्वशक्तिमान है तो क्यों किसी आपदा को नहीं रोकता? या वह प्राकृतिक आपदाओं को रोकने में समर्थ नहीं है ? यदि वह समर्थ नहीं है तो वह सर्वशक्तिमान कैसे हो सकता है? यदि सारी आपदाएं ईश्वर की इच्छा से आती हैं तो वह दयावान कैसे हो सकता है? आपदा या महामारी के समय ईश्वर के घर के दरवाजे (मंदिर, मस्जिद, चर्च) बंद क्यों हो जाते हैं? अपनी संतान को मुसीबत में देख कर अपने घर के दरवाजे बंद करने वाला ईश्वर दयावान कैसे हो सकता है?  क्या ईश्वर इतना क्रूर है कि वह अपनी ही सन्तान को तडप तड़प कर मरने के लिये छोड़ देता है? उसकी एक संतान उसकी दूसरी संतान का भोजन क्यों है? क्या कोई माँ या पिता इतना क्रूर हो सकता है कि वह अपनी एक संतान को अपनी दूसरी संतान का भोजन बना दे? यदि स्रष्टि की सभी घटनाएँ ईश्वर की इच्छा से घटित होती हैं तो क्या स्रष्टि में जो भी आपदाएं या महामारी जन्म लेती हैं क्या उसका जिम्मेदार ईश्वर है?

 

            कुरआन के अनुसार- अल्लाह आकाशों और पृथ्वी को बनाने वाला है। वह जब किसी कार्य का करना ठहरा लेता है तो बस उसके लिए वह कह देता है कि ‘हो जा’, तो वह हो जाता है। जो अल्लाह की किताब पर ईमान लाये हैं उनकी दुआओं को अल्लाह सुनता है और उनकी सभी समस्याओं को दूर करता है|

 

गीता के अनुसार – इस स्रष्टि का रचियता में हूँ | इस स्रष्टि की उत्पत्ति मेरी इच्छा से हुई है और इस इस स्रष्टि का विनाश भी मेरी इच्छा से होगा | प्रथ्वी पर जब भी कोई संकट आएगा, तब तब में अवतार लेकर मावन जाति का उद्धार करने आऊंगा|

 

प्रथ्वी पर कई बार प्राकृतिक आपदाएं और महामारी ने दस्तक दी है| वर्तमान में पूरी प्रथ्वी कोरोना नामक महामारी से ग्रसित हैं| सभी देशों के वैज्ञानिक इस महामारी का इलाज ढूँढने की कोशिश कर रहे हैं| वैज्ञानिकों ने पहले भी सभी महामारियों का इलाज ढूँढा है और उम्मीद है कि वे इस बीमारी का इलाज भी ढूँढ लेंगे| लेकिन इस संकट की स्थिति में जब सभी लोग ईश्वर को याद कर रहे हैं तो ईश्वर कहीं छुपा बैठा है| ईश्वर ने अपने घर के सारे दरवाजे बंद कर लिये हैं| मुस्लिमों को उम्मीद है कि उनका अल्लाह एक बार कहेगा कि “ख़तम हो जा” और कोरोना महामारी ख़तम हो जाएगी| हिन्दुओं को उम्मीद है कि उनका ईश्वर अवतार लेकर प्रथ्वी पर आएगा और इस महामारी से मानव जाति को बचाएगा| ना तो अल्लाह बचाएगा और ना ही ईश्वर| इस बीमारी का इलाज विज्ञान की मदद से ही खोजा जा सकता है| जब चीन में मुस्लिमों का नरसंहार किया गया था तब मुस्लिमों के द्वारा कहा गया था कि ये अल्लाह के द्वारा चीन पर कहर बरपाया गया है क्योकि उन्होंने ईमान वालों की हत्या की है| लेकिन इस्लाम को मानने वाले और कुरआन पर अपना ईमान लाने वाले मुस्लिम देश क्यों इसकी चपेट में आ गए? क्या वे ईमान वाले नहीं हैं? जब ये महामारी इस्लामिक देशों में फैली तो हिन्दुओं ने भी इस्लाम और कुरआन का खूब मजाक उड़ाया| हिन्दुओं के भी तो 33 कोटि देवी-देवता हैं| बहुत से हिंदूवादी नेताओं और धर्म गुरुओं द्वारा बयान दिए गए कि हिन्दुओं को इस महामारी से डरने की जरुरत नहीं है क्योंकि हिन्दुओं के साथ 33 कोटि देवी-देवता हैं| तो कहाँ हैं 33 कोटि देवी देवता? क्यों वे इस महामारी को भारत में आने से नहीं रोक पाए? आज तक मनुष्यों ने जो पैसा मदिरों और मजारों पर अपनी खुशहाली के लिये चढ़ाया है वो पैसा भी आपके काम नहीं आ रहा है| जरा सोचिये जो हजारों करोड़ रुपये मनुष्यों ने ईश्वर के नाम पर मदिरों-मजारों को दे दिए गए हैं यदि वह पैसा शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च किया गया होता तो क्या कभी ऐसी विकराल स्थिति उत्पन्न होती? आज सम्पूर्ण देश अपने घरों में बंद है| वह ईश्वर से दया की भीख मांग रहा है| लेकिन दया ईश्वर का स्वभाव ही नहीं है| दया की भावना तो मनुष्यों के द्वारा स्वयं विकसित की गयी है|

जब जब मनुष्य ने प्रकृति के साथ खिलवाड़ किया है तब तब प्रकृति ने मनुष्य जाति को छोटा साबित किया है| जब जब मनुष्य ने विकास के नाम पर प्रकृति का दोहन किया है तब तब प्रकृति ने मनुष्यों को सजा दी है| मनुष्यों को सजा देने में ईश्वर की कोई भूमिका ही नहीं है| यदि ईश्वर ने ही मनुष्य को और प्रकृति को बनाया है तो क्यों वह मनुष्य को प्रकृति का दोहन करने से नहीं रोक पाता? या जब प्रकृति पलट कर मनुष्यों पर वार करती है तब क्यों ईश्वर स्वयं आकर मनुष्य जाति की रक्षा नहीं करता? दो ही कारण हो सकते हैं या तो ईश्वर कायर है या ईश्वर का कोई अस्तित्व ही नहीं है|

 

बच्चे से यह कहना कि ईश्वर ही सर्वशक्तिमान है, मनुष्य कुछ भी नहीं, मिट्टी का पुतला है, बच्चे को हमेशा के लिए कमजोर बनाना है। उसके दिल की ताकत और उसके आत्मविश्वास की भावना को ही नष्ट कर देना है। – भगत सिंह

 

 

 

 

 

 

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