कोरोना संक्रमण फैलने के लिये कौन जिम्मेदार? जमाती या सरकार?


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Categories : THE LOCKDOWN
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एक जंगल था| जंगल का राजा शेर था| एक बार जंगल में एक भयानक बीमारी फ़ैल गयी| ये बीमारी एक दूसरे के संपर्क में आने से फैलती थी| इस बीमारी का इलाज किसी के पास नहीं था| इस बीमारी से बचने का एकमात्र उपाय था एक दूसरे से दूरी बनाकर रखना| एक दिन राजा ने निर्णय लिया कि जंगल के सभी काम बंद कर दिए जाएँ, सभी जानवर अपने अपने घरों में रहें ताकि इस बीमारी से सभी जानवरों को बचाया जा सके| सभी जानवरों ने इस निर्णय का स्वागत किया| जंगल में भेडियों का एक समूह था जिनका काम जंगल के जानवरों की समस्याओं के बारे में शेर को बताना और शेर के द्वारा जानवरों के लिये किये गए कामों के बारे में बताना था| चूँकि शेर अन्य जानवरों की जरूरतों को पूरा करने में नाकाम था इसलिए उसने भेडियों को लालच दिया और उनसे कहा “तुम शेर की नाकामियों के बारे में कभी जानवरों को नहीं बताओगे| जानवरों की समस्याओं से उनका ध्यान किसी दूसरी ओर मोड़ना है”| जब जंगल के सारे काम बंद हो गए तो जानवरों ने शेर से सवाल करना शुरू किया | हम लोग इतने दिनों तक भूखे कैसे रहेंगे? हमारा और हमारे परिवार बिना खाने खाए कैसे जिन्दा रह पायेगा? जब जानवरों ने अपने हक के लिये आवाज़ उठाना शुरू किया तो भेडियों नें जानवरों का ध्यान भटकाने के लिये कई तरह के तरीके अपनाये लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली| जंगल में कुछ सियार थे जो झुण्ड बना कर रहते थे| भेडियों ने अन्य जानवरों का ध्यान भटकाने के लिये सियारों को निशाना बनाया| भेडियो ने जंगल में ये अफवाह फैलाना शुरू कर दिया कि ये बीमारी सियारों ने फैलायी है| ये बात सुनकर सभी जानवरों ने अपने हक की बात भूलकर सियारों को कोसना शुरू कर दिया| जब भी जानवर अपने हक़ की आवाज़ उठाते तो भेडिये सियारों की बात याद दिला देते और जानवर अपनी भूख भूल जाते|

 

इस कहानी में आप समझ चुके होंगे कि शेर कौन है? भेड़िया कौन है और सियार कौन है? लॉक डाउन के बाद प्रधानमंत्री जी कई बार टीवी और रेडियो के माध्यम से जनता को संबोधित कर चुके हैं लेकिन एक बार भी उन्होंने नहीं बताया कि सरकार किस प्रकार से देश के नागरिकों की मदद कर रही है? जिस वक़्त देश की जनता अपने घर वापस जाने की जद्दोजहद में लगी हुई थी उस वक़्त मीडिया अन्ताक्षरी खेल रहा था| लॉक डाउन के एक हफ्ते तक सभी न्यूज़ चैनल्स को देखकर लगता था कि देश में कोई समस्या ही नहीं है| जो मीडिया सिर्फ हिन्दू – मुसलमान पर बहस करता था, लॉक डाउन के कारण उसे कोई ऐसी खबर नहीं मिल रही थी जो उसे धार्मिक उन्माद फ़ैलाने का मौका दे| फिर एक दिन उन्हें तबलीगी जमात मिली| यही वो मौका था जिसके द्वारा भेडियों ने शेर की नाकामियों को छुपाया| तबलीगी जमात को पूरे देश के सामने इस तरह से प्रस्तुत किया जैसे ये बीमारी तबलीगी जमात वाले ही चीन से लाये हों| मजदूरों को खाने की व्यवस्था करने की आवाज़ जो कि जनता के द्वारा उठाई जा रही  थी, वो दब चुकी थी| देश के सारे स्वघोषित राष्ट्रवादी ( फर्जी राष्ट्रवादी ) जाग चुके थे| जिन फर्जी राष्ट्रवादियों को मजदूर की आवाज़ सुनाई नहीं दे रही थी, तबलीगी जमात के कारनामे की खबर उनके कान में गूंजने लगीं थी| मीडिया ने और फर्जी राष्ट्र भक्तों ने सोशल मीडिया के माध्यम से मुसलमानों के पुराने विडियो (1.जिसमे मुसलमान पुलिस पर थूकते हुए नज़र आ रहा है|, 2. मुसलमान फलों को चाटते हुए नज़र आ रहा है|)  के आधार पर यह साबित करने की कोशिश की कि मुसलमान जानबूझकर कोरोना को फैला रहे हैं| लेकिन दोनों वीडियो पुराने थे जिनका कोरोना से कोई सम्बन्ध नहीं था| सभी न्यूज़ चैनल और सोशल मीडिया के माध्यम से इस खबर को इतना अधिक प्रचारित किया गया कि गरीबों, मजदूरों की आवाज़ इस शोर में कहीं खो गयी| मीडिया ने पूरे देश का ध्यान आम जनमानस की समस्याओं से हटाकर तबलीगी जमात पर केन्द्रित करने की कोशिश की| मीडिया इसमे कामयाब भी हुआ| मीडिया की इस हरकत की वजह से देश जमातियों के मुद्दे पर दो गुटों में बंट गया| एक धडा जमातियों को आरोपी बनाकर कटघरे में खड़ा करने में लगा था तो दूसरा धडा जमातियों को पाक साफ साबित करने में जुटा हुआ था| पर क्या जमाती वास्तव में पाक साफ़ थे?

 

तबलीगी जमात लगभग 180 देशों में फैली हुई है| इसका केंद्र दिल्ली में है| जमाती हर वर्ष दिल्ली मरकज में धार्मिक कार्यक्रम में हिस्सा लेते हैं| जहाँ से सभी जमाती धर्म प्रचार करने के लिये अपने अपने रास्ते पर निकल जाते हैं|इस वर्ष मार्च में तबलीगी जमात के तीन कार्यक्रम थे| पहला 08 से 10 मार्च , दूसरा 15 से 17 मार्च और तीसरा 22 से 24 मार्च| 12 मार्च को दिल्ली सरकार ने कुछ दिशा निर्देश जारी किये थे जिसमे खंड 8 व् खंड 9 मुख्य थे| खंड 8 – यदि कोई व्यक्ति पिछले 14 दिनों में किसी ऐसे देश से आ रहा है जो कोविड 19 से संक्रमित है तो उसको कण्ट्रोल रूम में इसकी सूचना देनी होगी| खंड 9 – यदि कोई व्यक्ति पिछले 14 दिनों में किसी ऐसे देश से आ रहा है जो कि कोविड 19 से संक्रमित है लेकिन उसमे कोरोना के लक्षण नहीं आ रहे हैं तो उसे स्वयं को क्वारंटाइन करना होगा एवं किसी भी प्रकार के कार्यक्रम में शामिल नहीं होगा| सरकार ने 16 मार्च को कोरोना को देखते हुए एक नोटिस जारी किया था जिसमे लिखा था कि राज्य में  किसी भी प्रकार का धार्मिक कार्यक्रम ना किया जाए| हालाँकि जमातियों ने कोई धार्मिक कार्यक्रम तो नहीं किया परन्तु विदेश से आये हुए जमातियों ने दिल्ली सरकार के द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों का पालन भी नहीं किया| इंडोनेशिया, मलेशिया आदि कोरोना से संक्रमित देशों से आये हुए जमातियों में कोरोना के लक्षण पाए गए| जब उनकी जांच की गयी तो उनमे से अधिकांश जमाती कोरोना पोजिटिव (18 मार्च की रिपोर्ट के आधार पर)  पाए गए| अभी तक पूरा मीडिया शांत था क्योंकि जमातियों से जुडा यह पहला किस्सा था और ना ही उस वक़्त तक देश में लॉक डाउन किया गया था| 24 मार्च को प्रधानमंत्री ने 21 दिन का देशव्यापी लॉक डाउन घोषित कर दिया| साथ ही लोगों से अपील की गयी कि जो व्यक्ति जहाँ है वहीँ रुका रहे| सभी लोगों ने इस अपील को माना और जहाँ थे वहीँ रुके रहे| जमाती भी जहाँ थे वहीँ रुके रहे| 31 मार्च को जब मीडिया को पता चला कि जमाती मरकज में रुके हुए हैं तो ये खबर देश की सबसे बड़ी खबर बन गयी| मीडिया को इसी मौके का इंतज़ार था| सभी देशवासियों को बताया गया कि देश में कोरोना संक्रमण फैलने का एक मात्र कारण जमाती ही हैं| जमातियों ने भी खुद को निर्दोष साबित करने के लिये कहा कि उन्होंने प्रशासन को पहले ही जानकारी दे दी थी| उन्होंने 25 मार्च को प्रशासन को दी गयी चिट्ठी का हवाला दिया| सवाल ये है कि जब दिल्ली सरकार ने 16 मार्च को ही आदेश किया था कि राज्य में किसी भी प्रकार का धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जायेगा तो 9 दिनों तक सभी जमाती मरकज में क्यों रहे? मरकज के प्रशासन को सरकार को सूचना देने के लिये 9 दिनों का इंतज़ार क्यों करना पड़ा? जब दिल्ली सरकार को इस बात की सूचना 25 मार्च को मिल चुकी थी तो दिल्ली सरकार ने जमातियों को वहां से निकालने के लिये एक हफ्ते इंतज़ार क्यों किया? आखिर क्यों चिट्ठी मिलने के तुरंत बाद जमातियों की स्क्रीनिंग , टेस्टिंग शुरू नहीं की गयी? ऐसे बहुत से सवाल हैं जिनका जवाब ना तो मरकज प्रशासन देगा और ना ही सरकार|

तबलीगी जमात क्या है?

 

असल में देश की व राज्यों की सरकारों को अपनी नाकामी छुपाने के लिये बहाना चाहिए था और ये बहाना जमातियों की जाहिलियत ने सरकार को दिया| सरकारों ने अपनी नाकामियों का ठीकरा जमातियों पर फोड़ दिया| मीडिया ने सरकार को जनता की नज़रों में निर्दोष साबित कर दिया| जमातियों की जाहिलियत और सरकार के नाकारापन के कारण आज देश का मजदूर सड़कों पर दर दर की ठोकरें खा रहा हैं|

 

 

 

 

 

 

 

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